
थककर चूर हों तो बच्चे की यादों की किताब में क्या लिखें
एक-एक पंक्ति की दस यादें, जो पूरे पन्ने से ज़्यादा कुछ सहेज लेती हैं। रात तीन बजे उन लोगों ने आज़माई हैं जो अपना नाम भी मुश्किल से लिख पा रहे थे।
कहानी पढ़ेंपरिवार की ज़िंदगी से कुछ बातें
कुछ जानी-पहचानी कहानियाँ, थोड़ा हौसला और लिखने को कुछ ऐसा, जब सोचने की भी ताक़त न बची हो। उन लोगों के लिए जो यादें सँभालते हैं।

एक-एक पंक्ति की दस यादें, जो पूरे पन्ने से ज़्यादा कुछ सहेज लेती हैं। रात तीन बजे उन लोगों ने आज़माई हैं जो अपना नाम भी मुश्किल से लिख पा रहे थे।
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आज थोड़ा-सा सहेजें। उम्र भर मुड़कर देखें।
इन्हें सहेजना शुरू करें, एक-एक छोटे पल से।
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