बच्चे की यादों की किताब आपके उस रूप की निशानी है, जो अभी बस कल्पना में है। वह जिसे पूरी नींद मिलती है। जो जलरंगों से चित्र बनाता है। जिसे मार्च के किसी मंगलवार को पता होता है कि इसी हफ़्ते एक पैराग्राफ़ लिखना है — बच्चे की उस हँसी पर, जो किसी नन्ही मशीन जैसी लगती है और जिसे सुनकर बर्तन धोने की मशीन को भी जलन हो जाए।
लेकिन गोद में बच्चा लिए असली आप कुछ और ही हैं। आपके पास पंद्रह सेकंड हैं और बस एक हाथ ख़ाली है। तो ये रहीं एक-एक पंक्ति की दस बातें, जो एक पैराग्राफ़ से ज़्यादा काम की हैं — सबसे कम दिमाग़ लगाने वाली पहले।
यह रही सूची
- आज उसने पैर वाली वह हरकत फिर की।
- पहली बार कुत्ते को देखकर हँसा। कुत्ता ज़रा भी प्रभावित नहीं हुआ।
- दुकान में चीख-पुकार हुई। किसी तरह ख़रीदारी से लौट आए।
- अपने हाथ खोज लिए। तब से नीचे ही नहीं रखे।
- कुछ कहा जो ‘पास्ता’ जैसा लगा। चलो, पास्ता ही सही।
- लगातार चार घंटे सोया। हम रो पड़े।
- छत के पंखे को ऐसे देखा जैसे उससे पैसे वसूलने हों।
- हरी फलियाँ चखीं। उन्होंने भी कम नहीं छकाया।
- कपड़े में लपेटे बिना पहली रात। हममें से एक रोया।
- वही आवाज़। आप जानते हैं कौन-सी। उसने फिर निकाली।
एक वाक्य हर बार ख़ाली पन्ने से बेहतर है। क्यों हुआ, यह बाद में जोड़ सकते हैं। क्या हुआ था, वह बाद में वापस नहीं ला सकते।
अगर एक वाक्य भी ज़्यादा लगे, तो तस्वीर लें और तीन शब्द जोड़ दें। बाक़ी Kaiary आपके लिए सँभाल लेगा — आवाज़ में नोट, तारीख़, कौन वहाँ था। आप ग़ौर करें; हम सहेजेंगे।



